सप्तपुरियों में से एक उज्जैन भारत का सबसे प्राचीन तीर्थस्थल है, इसलिए भगवान महाकाल की नगरी में काल सर्प दोष की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के ऊपर श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर हैं (सांपो के भगवान) शिवपुराण के अनुसार ऐसी मान्यता हैं की यदि उज्जैन में की गई कालसर्प दोष पूजा अत्यंत फलदायी और शत प्रतिशत दोष का निवारण करने वाली मानी जाती है। इसलिए हजारों श्रद्धालु हर महीने यहाँ आते हैं यहाँ अनुभवी और प्रमाणित पंडितों द्वारा शास्त्र अनुसार विधि से पूजा करवाई जाती है।
पारंपरिक रूप से कालसर्प दोष की शांति जल तीर्थों यानी नदियों के किनारे की जाती है। उज्जैन में यह पूजा मुख्य रूप से मोक्षदायिनी माँ क्षिप्रा नदी के विभिन्न घाटों और उनके किनारे स्थित सिद्ध मंदिरों में संपन्न होती है। यह पूजा क्षिप्रा के किसी भी घाट पर की जा सकती है, लेकिन कुछ विशेष घाट और मंदिर इसके लिए अत्यधिक सिद्ध माने गए हैं।
अगर आप जानना चाहते हैं कि उज्जैन में काल सर्प दोष की पूजा कहाँ होती है, तो यह पूरा गाइड आपके लिए है।
उज्जैन में काल सर्प दोष पूजा कहाँ की जाती है? (मुख्य स्थान)
1. श्री नरसिंह घाट (Shree Narsimha Ghat)
रसिंह घाट को उज्जैन में ‘शाप विमोचन घाट’ के नाम से भी जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है— ‘शाप विमोचन’ यानी हर प्रकार के दोष से मुक्ति दिलाने वाला स्थान। कालसर्प दोष को भी पूर्व जन्म के कर्मों या किसी शाप का ही परिणाम माना जाता है। यह घाट महाकाल मंदिर से 10 मिनट्स और हरसिद्धि से 5 मिनट्स की दूरी पर हैं ।
यह घाट माँ क्षिप्रा के सबसे स्वच्छ और सुंदर घाटों में से एक है। रामघाट की तुलना में यहाँ थोड़ी शांति रहती है, जो कि लंबे अनुष्ठानों के लिए बहुत आवश्यक है। यहाँ कालसर्प दोष के अलावा नवग्रह शांति, पितृ दोष, और जन्म कुंडली में निर्मित अन्य सभी प्रकार के दोषों (जैसे चांडाल दोष, ग्रहण दोष) की शांति का अनुष्ठान बड़े ही विधि-विधान से संपन्न कराया जाता है। यहाँ अनुष्ठान करने पर यजमान को मानसिक शांति की तत्काल अनुभूति होती है।

2. सिद्धाश्रम रामघाट (Ram Ghat)
रामघाट उज्जैन का सबसे मुख्य, प्राचीन और प्रसिद्ध घाट है। सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान प्रमुख स्नान (शाही स्नान) इसी घाट पर होता है। महाकाल मंदिर से 5 -7 मिनट यानि लगभब 500-600 मीटर की दुरी पर हैं।
मान्यता है कि भगवान श्री राम ने अपने पिता राजा दशरथ का तर्पण इसी घाट पर किया था। यह घाट अत्यंत सिद्ध है। यहाँ पूजा करने का अर्थ है सीधे तौर पर माँ क्षिप्रा के हृदय स्थल पर बैठकर ईश्वर से क्षमा याचना करना। चूँकि यह सबसे प्रसिद्ध घाट है, इसलिए यहाँ पंडों और पुजारियों की अच्छी खासी व्यवस्था रहती है। आप यहाँ बैठकर कालसर्प दोष की शांति करवा सकते हैं। यहाँ शाम के समय माँ क्षिप्रा की भव्य आरती भी होती है, जिसे आप अनुष्ठान के बाद देख सकते हैं।

3. द्वादश ज्योतिर्लिंग श्री चारधाम मंदिर (Chardam )
महाकाल मंदिर से दूरी मात्र 500 मीटर के भीतर (महाकाल महालोक के ठीक पास) यह मंदिर हरसिद्धि माता मंदिर के ठीक पीछे और महाकाल मंदिर के अत्यंत निकट स्थित है। इसे शांतिपूर्ण अनुष्ठानों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
चारधाम मंदिर परिसर में भारत के चारों धामों और बारह ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां स्थापित हैं। यहाँ का वातावरण बहुत ही आध्यात्मिक और शांत है। जो बुजुर्ग या शारीरिक रूप से कमजोर श्रद्धालु घाट की सीढ़ियां नहीं उतर सकते या जिन्हें नदी के किनारे की भीड़भाड़ से बचना है, वे चारधाम मंदिर के प्रांगण में अपना कालसर्प शांति अनुष्ठान करवा सकते हैं।
1. श्री मंगलनाथ मंदिर (Shree Mangalnath Temple)

- उज्जैन में सबसे अधिक काल सर्प दोष की पूजा मंगलनाथ मंदिर पास क्षिप्रा नदी के घाट पर की जाती है।
- यहाँ सभी प्रकार के काल सर्प योग/दोष की पूजा के साथ अन्य सभी तरह की पूजा अनुष्ठान एवं अभिषेक की जाती हैं।
- शहर के शोरशराबे से दूर यहाँ का शांतिप्रिय और रमणीय क्षिप्रा नदी के घाट अत्यंत मनोहारी लगते हैं।
- भगवन मंगलनाथ की उपस्तिथि में कालसर्प दोष का निवारण पूजा, के अंतर्गत पंचांग कर्म, रुद्र अभिषेक, राहु-केतु शांति, नवकुल नाग शांति, नाग-नागिन के जोड़े का विसर्जन, हवन – सब एक ही स्थान पर किया जाता हैं।
2. अंगारेश्वर मंदिर के पास क्षिप्रा नदी घाट

- अंगारेश्वर महादेव मंदिर के समीप क्षिप्रा नदी के पावन घाट पर कालसर्प पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि यह स्थान आध्यात्मिक ऊर्जा और वैदिक परंपराओं के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
- माना जाता है कि क्षिप्रा नदी का शुद्ध जल और शिव क्षेत्र की दिव्य वातावरण पूजा के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। यहाँ विधिपूर्वक की गई कालसर्प दोष शांति पूजा से व्यक्ति के जीवन में आ रही लगातार रुकावटें, विवाह में देरी, पारिवारिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता और मानसिक अशांति जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
- श्रद्धा, मंत्रोच्चार और पवित्र स्थान के संयोग से यह पूजा अधिक फलदायी मानी जाती है, इसी कारण श्रद्धालु अंगारेश्वर मंदिर के पास क्षिप्रा घाट पर कालसर्प पूजा करवाना श्रेष्ठ मानते हैं।
3. सिद्धवट घाट शिप्रा नदी घाट

- सिद्धवट घाट पर भी काल सर्प दोष की पूजा करवाई जाती है।
- यहाँ शिप्रा नदी तट पर पूजा करने का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।
- काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए नदी तट पर की गई पूजा अत्यंत लाभदायक मानी गई है।
4. कोटितीर्थ एवं रामघाट क्षेत्र

- यहाँ कई अधिकृत पूजा स्थलों पर शास्त्रीय नियमों के अनुसार काल सर्प दोष निवारण कराया जाता है।
- रामघाट पर स्नान + पूजा का संयुक्त महत्व।
- अनुभवी पंडित यहाँ नियमित रूप से सामूहिक एवं व्यक्तिगत पूजा कराते हैं।
उज्जैन में काल सर्प दोष पूजा क्यों विशेष मानी जाती है?
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यह महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्थान है जहाँ राहु-केतु शांति का अत्यधिक प्रभाव माना गया है।
- महाकालेश्वर मंदिर के ऊपर भगवन शिव जी का यहाँ विशेष मंदिर श्री नागचंद्रेश्वर हैं जो वर्ष में एक बार केवल नागपंचमी के दिन खुलता हैं।
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उज्जैन को कालचक्र का केंद्र कहा गया है, इसलिए तांत्रिक एवं वैदिक दोनों प्रकार की पूजा यहाँ सिद्ध मानी जाती है।
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यहाँ के पंडित प्राचीन काल से इस पूजा में पारंगत हैं।
- पुराणों के अनुसार अगर उज्जैन में कोई भी पूजा की जाती हैं तो उसका 1000 गुना अधिक फल मिलता हैं।
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75+ वर्षों के अनुभव के साथ रजिस्टरड/अधिकृत पंडित मनीष शर्मा जी उज्जैन में कालसर्प दोष शांति कराने के लिए विश्वसनीय और शास्त्रसम्मत पंडित माने जाते हैं। यदि आप अपनी कुंडली अनुसार सही, परिणामदायी और पूरी विधि से कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन में कराना चाहते हैं, तो आज ही संपर्क करें: Call 9329168061
उज्जैन में पूजा करवाने से पहले क्या जानना चाहिए?
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पूजा सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच सबसे शुभ मानी जाती है।
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पंडित/गुरुजी की बुकिंग पहले कर लें, क्योंकि सीजन में भीड़ रहती है।
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अपनी जन्मपत्री या जन्म विवरण साथ रखें।
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पूजा की वीडियो/फोटो सामान्यतः अनुमति पर निर्भर करती है।
उज्जैन में पूजा कराने के लिए सही पंडित कैसे चुनें?
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पंडित का अनुभव और रिव्यू देखें
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शुल्क और पूजा की स्पष्ट जानकारी पूछें
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सभी समग्री शामिल है या नहीं, यह पूछ लें
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पंडित रजिस्टरड/अधिकृत होना चाहिए
काल सर्प दोष पूजा के फायदे
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मानसिक शांति
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बाधाओं और अड़चनों में कमी
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करियर/व्यापार में सुधार
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विवाह/परिवारिक जीवन में सकारात्मकता
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स्वास्थ्य और मनोबल में वृद्धि
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ग्रहों का संतुलन और शुभ प्रभाव


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